गिरनार सीढ़ियाँ चढ़ाई गाइड 2026: कितनी सीढ़ियाँ, कितना समय, अंबाजी से दत्तात्रेय शिखर तक (Girnar Steps Trek Guide)
प्रतीकात्मक चित्र (इलस्ट्रेशन)
🗓️ Last checked: Oct 2026 (25 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया)
⚡ Quick Facts
| कुल सीढ़ियाँ | लगभग 10,000 पत्थर की सीढ़ियाँ (गुजरात टूरिज़्म के अनुसार) |
| सबसे ऊँचा शिखर | गोरखनाथ शिखर, 1,117 मीटर — गुजरात का सबसे ऊँचा |
| कितना समय | सबसे ऊपर के मंदिरों तक जाना है तो पूरा दिन रखें |
| कब शुरू करें | सुबह-सुबह (भोर में) — गुजरात टूरिज़्म की सलाह |
| खुलने का समय | सुबह से शाम तक (Dawn–Dusk) |
| सबसे अच्छा मौसम | नवंबर – फ़रवरी |
| शुरुआत | भवनाथ तलेटी (गिरनार तलेटी), जूनागढ़ |
गिरनार (Girnar) पर्वत पर चढ़ना सिर्फ़ एक ट्रेक नहीं, एक यात्रा है। जूनागढ़ के पास खड़ा यह पवित्र पर्वत हिंदू और जैन, दोनों के लिए बहुत खास है। नीचे भवनाथ तलेटी से शुरू होकर पत्थर की हज़ारों सीढ़ियाँ जैन मंदिरों, माँ अंबाजी, गोरखनाथ और गुरु दत्तात्रेय शिखर तक जाती हैं। इस गाइड में हम बता रहे हैं — कुल कितनी सीढ़ियाँ हैं, रास्ते में कौन-कौन से पड़ाव आते हैं, कितना समय रखें, क्या साथ ले जाएँ और रोपवे लें या पैदल चढ़ें।
ध्यान दें: हर पड़ाव तक की सीढ़ियों की सही गिनती किसी आधिकारिक साइट पर नहीं मिली, इसलिए हमने वहाँ नंबर नहीं लिखे। डोली का किराया भी तय नहीं मिला — वह तलेटी पर ही पूछकर पक्का करें।
गिरनार में कुल कितनी सीढ़ियाँ हैं?
गुजरात टूरिज़्म की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार तलेटी से शिखर तक लगभग 10,000 पत्थर की सीढ़ियाँ हैं। लोग इसे अक्सर "9,999 सीढ़ियाँ" भी कहते हैं — दोनों का मतलब एक ही है: लगभग दस हज़ार। चढ़ाई सीधी नहीं है; पहले शिखर (अंबाजी) के बाद रास्ता कुछ जगह नीचे उतरता है और फिर ऊपर चढ़ता है, ताकि बाकी शिखरों तक पहुँचा जा सके।
रास्ते के पड़ाव: तलेटी से दत्तात्रेय शिखर तक
नीचे दी गई टेबल में पड़ाव उसी क्रम में हैं जिस क्रम में चढ़ते समय आते हैं (गुजरात टूरिज़्म के विवरण के अनुसार)।
| पड़ाव | क्या है | ध्यान दें |
|---|---|---|
| 1. भवनाथ तलेटी | चढ़ाई की शुरुआत, भवनाथ महादेव मंदिर | यहीं से सीढ़ियाँ और रोपवे शुरू होते हैं |
| 2. जैन मंदिर | लगभग दो-तिहाई रास्ते पर; नेमिनाथ मंदिर (12वीं सदी), मल्लिनाथ मंदिर (1177) | कई मंदिर लगभग 11 से 3 बजे तक बंद रहते हैं; नेमिनाथ मंदिर पूरे दिन खुला |
| 3. माँ अंबाजी मंदिर | पहला शिखर; नवविवाहित जोड़े यहाँ दर्शन करते हैं | रोपवे इसी के पास तक आता है |
| 4. गोरखनाथ शिखर | गुजरात का सबसे ऊँचा शिखर, 1,117 मीटर | अंबाजी के बाद रास्ता नीचे-ऊपर होता है |
| 5. गुरु दत्तात्रेय शिखर | खड़ी चढ़ाई; त्रिमुखी दत्तात्रेय का स्थान | सबसे कठिन हिस्सा, आराम से चढ़ें |
| 6. कालिका | आख़िरी चट्टान पर माँ काली का स्थान | बहुत कम यात्री यहाँ तक जाते हैं |
चढ़ाई में कितना समय लगता है?
गुजरात टूरिज़्म साफ़ कहता है — अगर आप सबसे ऊपर के मंदिरों तक जाना चाहते हैं, तो पूरा दिन रखकर चलें। समय आपकी फ़िटनेस, उम्र, मौसम और भीड़ पर बहुत निर्भर करता है, इसलिए हम घंटों का पक्का नंबर नहीं लिख रहे। आसान नियम:
- भोर में शुरू करें — ठंडी हवा में चढ़ाई आसान रहती है और शाम ढलने से पहले नीचे आ जाते हैं।
- हर कुछ सौ सीढ़ियों पर 2–3 मिनट रुकें, लंबा बैठने से पैर अकड़ जाते हैं।
- उतरते समय घुटनों पर ज़्यादा ज़ोर पड़ता है — उतरने के लिए भी पूरा समय रखें।
सीढ़ियाँ या रोपवे — क्या चुनें?
| बात | पैदल सीढ़ियाँ | रोपवे + सीढ़ियाँ |
|---|---|---|
| किसके लिए | फ़िट युवा, यात्रा/तप के भाव से जाने वाले | बुज़ुर्ग, बच्चे, घुटनों की तकलीफ़ वाले |
| कहाँ तक | तलेटी से सभी शिखर | रोपवे अंबाजी के पास तक; आगे सीढ़ियाँ पैदल |
| ख़र्च | कोई टिकट नहीं | रोपवे टिकट लगता है (नीचे लिंक देखें) |
| अनुभव | पूरे रास्ते के मंदिर, नज़ारे | कम थकान, ऊपर के शिखरों के लिए ताक़त बचती है |
बहुत लोग ऊपर रोपवे से और नीचे सीढ़ियों से आते हैं, या इसका उल्टा करते हैं। रोपवे का टिकट, टाइमिंग और बुकिंग हमारी अलग गाइड में है: गिरनार रोपवे टिकट प्राइस और टाइमिंग 2026।
क्या साथ ले जाएँ (चेकलिस्ट)
- पानी की बोतल और ग्लूकोज़/ORS
- अच्छी पकड़ वाले जूते या स्पोर्ट्स शूज़ (चप्पल नहीं)
- हल्का बैग — कम सामान, कम थकान
- टोपी/गमछा, सनस्क्रीन; सर्दियों में सुबह के लिए हल्की जैकेट
- सूखा नाश्ता (चना, फल, बिस्किट)
- टॉर्च/मोबाइल फ़्लैशलाइट, अगर भोर से पहले शुरू कर रहे हैं
- ज़रूरी दवाइयाँ; घुटनों के लिए नी-कैप (knee cap) काम आता है
- कूड़ा वापस लाने के लिए एक छोटी थैली — पवित्र पर्वत को साफ़ रखें
चढ़ाई के ज़रूरी टिप्स
बुज़ुर्ग और बच्चे
पूरी चढ़ाई कठिन है। बुज़ुर्गों के लिए रोपवे सबसे अच्छा विकल्प है। सीढ़ियों पर डोली (कंधे पर उठाने वाली कुर्सी) की सुविधा भी मिलती है, लेकिन इसका किराया वज़न, दूरी और सीज़न के हिसाब से बदलता है और कोई आधिकारिक रेट नहीं मिला — तलेटी पर पहले से तय कर लें।
मंदिरों का समय
गुजरात टूरिज़्म के अनुसार कई जैन मंदिर लगभग सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक बंद रहते हैं, जबकि नेमिनाथ मंदिर पूरे दिन खुला रहता है। जल्दी चढ़ेंगे तो दर्शन भी आराम से होंगे।
भीड़ वाले दिन
नवंबर में गिरनार (लीली) परिक्रमा और माघ महीने (जनवरी–फ़रवरी) में भवनाथ मेले के समय बहुत भीड़ होती है। शांति से चढ़ना है तो इन दिनों से बचें। परिक्रमा के बारे में पढ़ें: गिरनार लीली परिक्रमा 2026।
सेहत
दिल, साँस या घुटनों की कोई तकलीफ़ है तो चढ़ाई से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें। चक्कर या साँस फूलने पर वहीं रुकें, ज़बरदस्ती न चढ़ें।
गिरनार तलेटी कैसे पहुँचें
गिरनार तलेटी (भवनाथ) जूनागढ़ शहर के पास है। जूनागढ़ तक गुजरात के दूसरे शहरों से ST और प्राइवेट बसें आती हैं, और जूनागढ़ पश्चिम रेलवे के नेटवर्क पर है (अहमदाबाद–वेरावल लाइन)। नज़दीकी बड़ा एयरपोर्ट राजकोट है (लगभग 102–103 km)। शहर से तलेटी तक ऑटो-रिक्शा या टैक्सी मिल जाती है। जूनागढ़ में और क्या घूमें: जूनागढ़ में घूमने की 10 जगहें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
गिरनार में कुल कितनी सीढ़ियाँ हैं?
गुजरात टूरिज़्म के अनुसार लगभग 10,000 पत्थर की सीढ़ियाँ हैं।
क्या एक दिन में दत्तात्रेय शिखर जाकर वापस आ सकते हैं?
हाँ, लेकिन पूरा दिन लगता है। भोर में शुरू करें और शाम से पहले उतरने का प्लान रखें।
रोपवे कहाँ तक जाता है?
रोपवे भवनाथ तलेटी से माँ अंबाजी मंदिर के पास तक जाता है। गोरखनाथ और दत्तात्रेय शिखर के लिए आगे सीढ़ियाँ पैदल चढ़नी पड़ती हैं।
गिरनार चढ़ने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
नवंबर से फ़रवरी (गुजरात टूरिज़्म के अनुसार), और दिन में सुबह-सुबह।
सबसे ऊँचा शिखर कौन सा है?
गोरखनाथ शिखर, 1,117 मीटर — यह गुजरात का सबसे ऊँचा शिखर है।
डोली का किराया कितना है?
कोई आधिकारिक रेट नहीं मिला। किराया बदलता रहता है, इसलिए तलेटी पर पहले से बात करके तय करें।
🗓️ Last checked: Oct 2026 (25 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया)
स्रोत (Sources): Gujarat Tourism – Girnar Hill (सीढ़ियाँ, शिखर, मंदिर समय, मौसम, कैसे पहुँचें) · जूनागढ़ ज़िला प्रशासन – Girnar · Udan Khatola – Girnar Ropeway (आधिकारिक)
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