गिरनार परिक्रमा 2026 तारीख: 20–24 नवंबर (संभावित), लीली परिक्रमा रूट
प्रतीकात्मक चित्र
🗓️ Last checked: Oct 2026 (23 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया)
⚡ Quick Facts
| तारीख़ 2026 | 20 – 24 नवंबर 2026 (रिपोर्ट के अनुसार) |
| तिथि | कार्तिक सुद एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा (देव दिवाली) |
| शुरुआत | भवनाथ तलेटी, जूनागढ़ |
| कुल दूरी | लगभग 36 km |
| मुख्य पड़ाव | झीणा बावा की मढ़ी, मालवेला, बोरदेवी |
| मौसम | रात में ठंड, दिन में धूप |
हर साल कार्तिक महीने में लाखों श्रद्धालु जूनागढ़ के पवित्र गिरनार पर्वत की लीली परिक्रमा करने आते हैं। “लीली” यानी हरी — क्योंकि यह परिक्रमा गिरनार के हरे-भरे जंगल के बीच से होकर गुज़रती है। मान्यता है कि गिरनार की प्रदक्षिणा से आध्यात्मिक शांति और अक्षय पुण्य मिलता है। इस पोस्ट में 2026 की तारीख़ें, पूरा रूट, पैकिंग लिस्ट और ज़रूरी सावधानियाँ दी गई हैं।
लीली परिक्रमा का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में गिरनार को अत्यंत पवित्र पर्वत माना जाता है। यहाँ भगवान दत्तात्रेय का स्थान है, माँ अंबाजी का मंदिर है और जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ से जुड़े प्राचीन मंदिर भी हैं — इसलिए जैन श्रद्धालु इसे नेमिनाथ पर्वत भी कहते हैं। साधु-संतों की तपोभूमि होने के कारण भवनाथ और गिरनार की तलहटी का माहौल कार्तिक में और भी भक्तिमय हो जाता है। परिवार के साथ, भजन-कीर्तन करते हुए, जंगल के बीच पैदल चलना — यही इस यात्रा की असली ख़ूबसूरती है। कई परिवार पीढ़ियों से हर साल यह परिक्रमा करते आ रहे हैं।
गिरनार लीली परिक्रमा 2026 की तारीख़ (Dates)
गुजराती जागरण की रिपोर्ट के अनुसार 2026 में लीली परिक्रमा 20 नवंबर 2026 (कार्तिक सुद अगियारस/एकादशी) से शुरू होकर 24 नवंबर 2026 (देव दिवाली / कार्तिक पूर्णिमा) को पूरी होगी। भारत सरकार के Utsav पोर्टल पर भी यही परंपरा बताई गई है — परिक्रमा कार्तिक सुद एकादशी से कार्तिक सुद पूनम तक होती है और भवनाथ मंदिर से शुरू होती है।
ज़रूरी: परिक्रमा का रास्ता खोलने का आधिकारिक समय जूनागढ़ प्रशासन और वन विभाग तय करते हैं। यात्रा से कुछ दिन पहले स्थानीय समाचार या प्रशासन की सूचना ज़रूर देख लें।
लीली परिक्रमा लगभग 36 किलोमीटर लंबी है और गिरनार के चारों ओर जंगल व पहाड़ी रास्तों से होकर जाती है। आमतौर पर इसके चार हिस्से माने जाते हैं:
1. भवनाथ से झीणा बावा की मढ़ी
यात्रा भवनाथ तलेटी से शुरू होती है। इटवा घोडी की ओर बढ़कर जंगल में प्रवेश होता है और लगभग 12 km चलकर झीणा बावा की मढ़ी पहुँचते हैं। हसनापुर डैम के पास यह जगह पहली रात रुकने के लिए जानी जाती है।
2. झीणा बावा की मढ़ी से मालवेला
इस रास्ते में चंद्र मौलेश्वर मंदिर (जिसे राणियो कुवो भी कहते हैं) आता है। फिर सरखडिया हनुमान की ओर से होते हुए मालवेला पहुँचते हैं। इस इलाके में जंगली जानवरों की आवाजाही रहती है, इसलिए समूह में ही चलें।
3. मालवेला से बोरदेवी
यह परिक्रमा का सबसे कठिन हिस्सा है, क्योंकि यहाँ नळपाणी घोडी की खड़ी और फिसलन वाली चढ़ाई-उतराई आती है। धीरे-धीरे, सावधानी से पार करें और बीच-बीच में आराम लें।
4. बोरदेवी से भवनाथ
बोरदेवी आख़िरी पड़ाव है। यहाँ से भवनाथ तलेटी लगभग 8 km दूर है, जहाँ पहुँचकर परिक्रमा पूरी होती है।
रहना और खाना
परिक्रमा के दौरान रास्ते में कई सेवाभावी संस्थाएँ और आश्रम अन्नक्षेत्र चलाते हैं, जहाँ यात्रियों को भोजन मिलता है। ज़्यादातर यात्री रात को पड़ाव पर खुले में या टेंट में रुकते हैं। भवनाथ तलेटी और जूनागढ़ शहर में धर्मशालाएँ और होटल हैं, लेकिन परिक्रमा के दिनों में बहुत जल्दी भर जाते हैं — इसलिए पहले से बुकिंग करें।
क्या ले जाएँ (Packing List)
- अच्छी पकड़ वाले जूते — स्पोर्ट्स शूज़ सबसे सही; नई चप्पल बिल्कुल नहीं।
- टॉर्च और एक्स्ट्रा बैटरी — सुबह जल्दी और रात में चलने के लिए।
- गरम कपड़े — नवंबर में जंगल में रात को ठंड होती है; शॉल/जैकेट और पतला कंबल।
- फ़र्स्ट-एड और अपनी दवाइयाँ — पट्टी, दर्द की दवा, ORS, और रोज़ की दवाएँ।
- पानी की बोतल (दोबारा भरने वाली), सूखा नाश्ता — चना, गुड़, खजूर।
- हल्का बैग, छोटी चादर/चटाई, मोबाइल पावर बैंक, फ़ोटो ID।
- कचरे के लिए एक थैली — जंगल को साफ़ रखना हमारी ज़िम्मेदारी है।
सुरक्षा टिप्स
- अकेले न जाएँ — परिवार या दोस्तों के समूह में ही चलें।
- वन विभाग और प्रशासन के निर्देशों का पूरी तरह पालन करें; तय रास्ते से बाहर न जाएँ — यह एशियाई शेरों का इलाका है।
- बुज़ुर्ग और दिल/साँस के मरीज़ डॉक्टर की सलाह के बाद ही जाएँ।
- भीड़ में बच्चों का हाथ पकड़ कर रखें और उनकी जेब में घर का मोबाइल नंबर लिखी पर्ची रखें।
- प्लास्टिक और कचरा जंगल में न फेंकें।
पहली बार जा रहे हैं? ये भी जानें
परिक्रमा के दिनों में भवनाथ में मेले जैसा माहौल रहता है और बहुत भीड़ होती है। इन्हीं दिनों गिरनार रोपवे पर भी लंबी लाइन लगती है, इसलिए रोपवे से दर्शन करने हैं तो सुबह सबसे पहले पहुँचें। परिक्रमा के बाद थकान उतारने के लिए एक दिन आराम रखें, फिर सोमनाथ या सासण गिर की ओर जा सकते हैं। ध्यान दें — सोमनाथ में भी कार्तिक पूर्णिमा पर 5 दिन का मेला लगता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
गिरनार लीली परिक्रमा 2026 कब है?
रिपोर्ट के अनुसार 20 नवंबर 2026 (कार्तिक सुद एकादशी) से 24 नवंबर 2026 (कार्तिक पूर्णिमा/देव दिवाली) तक। आधिकारिक समय के लिए जूनागढ़ प्रशासन की सूचना देखें।
लीली परिक्रमा कितने किलोमीटर की है?
लगभग 36 km। भवनाथ से शुरू होकर झीणा बावा की मढ़ी, मालवेला और बोरदेवी होते हुए वापस भवनाथ आती है।
परिक्रमा का सबसे कठिन हिस्सा कौन सा है?
मालवेला से बोरदेवी के बीच नळपाणी घोडी की खड़ी और फिसलन वाली चढ़ाई-उतराई सबसे कठिन मानी जाती है।
परिक्रमा में खाना कहाँ मिलता है?
रास्ते में सेवाभावी संस्थाएँ और आश्रम अन्नक्षेत्र चलाते हैं। फिर भी सूखा नाश्ता और पानी साथ रखें।
परिक्रमा पूरी करने में कितने दिन लगते हैं?
रास्ते में तीन मुख्य पड़ाव हैं और ज़्यादातर यात्री पड़ावों पर रात रुकते हुए आराम से कई दिनों में परिक्रमा पूरी करते हैं; तेज़ चलने वाले कम समय में भी कर लेते हैं। अपनी सेहत के हिसाब से योजना बनाएँ।
🗓️ Last checked: Oct 2026 (23 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया)
स्रोत (Sources): Gujarati Jagran – Girnar Lili Parikrama 2026 · Utsav (भारत सरकार) – Girnar Lili Parikrama · Shree Somnath Trust FAQ (कार्तिक पूर्णिमा मेला)
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