जूनागढ़ में घूमने की 10 जगहें: उपरकोट किला, अडी-कडी वाव, महाबत मकबरा, टिकट और टाइमिंग 2026 (Junagadh Tourist Places)
प्रतीकात्मक चित्र (इलस्ट्रेशन)
🗓️ Last checked: Oct 2026 (24 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया)
⚡ Quick Facts
| शहर | जूनागढ़, गुजरात (गिरनार पर्वत की तलहटी में) |
| सबसे अच्छा मौसम | नवंबर – फ़रवरी (गुजरात टूरिज़्म के अनुसार) |
| कितने दिन | शहर के लिए 1 दिन, गिरनार चढ़ाई के लिए 1 दिन अलग |
| उपरकोट किला टिकट | ₹100 (भारतीय, 12+ साल) — किले की बुकिंग साइट के अनुसार |
| अशोक शिलालेख | ₹25 भारतीय, सुबह 8 – शाम 6 (गुजरात टूरिज़्म के अनुसार) |
| नज़दीकी एयरपोर्ट | केशोद (लगभग 40 km, गुजरात टूरिज़्म के अनुसार) |
ज़्यादातर लोग जूनागढ़ (Junagadh) सिर्फ़ गिरनार चढ़ने या सासण गिर जाते समय रास्ते में रुकने के लिए आते हैं। लेकिन यह शहर अपने आप में एक पूरा इतिहास है — मौर्य काल का किला, सम्राट अशोक का 2,000 साल से भी पुराना शिलालेख, चट्टान काटकर बनाई गई बावड़ियाँ, नवाबों का शानदार मकबरा और गिरनार की तलहटी के पवित्र तीर्थ। इस गाइड में हम जूनागढ़ की 10 सबसे अच्छी जगहें, उनका टिकट-समय (जहाँ आधिकारिक जानकारी मिली) और एक दिन का आसान प्लान बता रहे हैं।
ध्यान दें: जिस जगह का टिकट या समय किसी आधिकारिक साइट पर नहीं मिला, वहाँ हमने कोई नंबर नहीं लिखा है — वहाँ जाकर या फ़ोन करके पक्का कर लें।
एक नज़र में: जूनागढ़ की 10 जगहें
| जगह | समय | टिकट (भारतीय) |
|---|---|---|
| 1. उपरकोट किला | 8 AM – 4 PM* | ₹100 (12+ साल) |
| 2. अडी-कडी वाव और नवघण कुवो | किले के अंदर | किले के टिकट में* |
| 3. बौद्ध गुफाएँ | सुबह से शाम तक | स्थानीय रूप से पता करें |
| 4. महाबत मकबरा | सुबह से शाम तक | स्थानीय रूप से पता करें |
| 5. अशोक शिलालेख | 8 AM – 6 PM | ₹25 |
| 6. दामोदर कुंड | — | — |
| 7. भवनाथ महादेव मंदिर | — | — |
| 8. गिरनार पर्वत / रोपवे | सुबह से शाम तक | रोपवे: अलग पोस्ट देखें |
| 9. सक्करबाग़ ज़ू | स्थानीय रूप से पता करें | स्थानीय रूप से पता करें |
| 10. विलिंगडन डैम और दातार | — | — |
* उपरकोट का समय किले की बुकिंग साइट से है, जो ख़ुद लिखती है कि समय मौसम के हिसाब से बदल सकता है। बावड़ियाँ किले के अंदर हैं; उनके लिए अलग टिकट है या नहीं, यह हमें किसी आधिकारिक साइट पर साफ़ नहीं मिला। "—" का मतलब है खुली/धार्मिक जगह जिसका कोई आधिकारिक टिकट-समय हमें नहीं मिला।
1. उपरकोट किला (Uparkot Fort)
गुजरात टूरिज़्म के अनुसार यह किला 319 ईसा पूर्व में मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त के समय बना माना जाता है और बाद में कई बार बढ़ाया गया। कहीं-कहीं इसकी दीवारें 20 मीटर तक ऊँची हैं, और कहा जाता है कि इसे 16 बार घेरा गया। किले के अंदर पुरानी मस्जिद, बौद्ध गुफाएँ, दो बावड़ियाँ और दीव से लाई गई एक बड़ी पुरानी तोप है। ऊपर से जूनागढ़ शहर और गिरनार का नज़ारा बहुत सुंदर दिखता है।
| टिकट (किले की बुकिंग साइट के अनुसार) | कीमत |
|---|---|
| भारतीय (12 साल और ऊपर) | ₹100 |
| भारतीय बच्चे (12 साल से कम) | ₹50 |
| जूनागढ़ निवासी (12+ / बच्चे) | ₹50 / ₹25 |
| विदेशी पर्यटक | ₹500 |
| लाइट एंड साउंड शो (भारतीय 12+ / बच्चे) | ₹177 / ₹88.50 (GST सहित) |
बुकिंग साइट पर समय सुबह 8 से शाम 4 बजे लिखा है, पर साथ में यह भी कि समय बदल सकता है; गुजरात टूरिज़्म की साइट पर "सुबह से शाम तक" लिखा है। इसलिए जाने से पहले किले के नंबर 87350-47350 पर समय पक्का कर लें। लाइट एंड साउंड शो का समय भी फ़ोन पर ही पूछें।
2. अडी-कडी वाव और नवघण कुवो (Adi Kadi Vav & Navghan Kuvo)
ये दोनों बावड़ियाँ उपरकोट के अंदर हैं और गुजरात की बाक़ी बावड़ियों से बिल्कुल अलग हैं — इन्हें ईंट-पत्थर जोड़कर नहीं, बल्कि एक ही चट्टान को काटकर बनाया गया है। गुजरात टूरिज़्म के अनुसार अडी-कडी वाव 15वीं सदी की है, लगभग 41 मीटर गहरी है और इसमें करीब 120 सीढ़ियाँ हैं। नाम के पीछे दो कहानियाँ हैं; ज़्यादा मानी जाने वाली कहानी यह है कि अडी और कडी दो दासियाँ थीं जो रोज़ यहाँ से पानी भरती थीं। नवघण कुवो लगभग 1,000 साल पुराना, करीब 52 मीटर गहरा कुआँ है, जिसकी सीढ़ियाँ कुएँ के चारों ओर घूमती हुई नीचे जाती हैं।
टिप: सीढ़ियाँ तंग और फिसलन वाली हो सकती हैं — बुज़ुर्गों और बच्चों के साथ ध्यान से उतरें।
3. बौद्ध गुफाएँ (Buddhist Caves / Khapra Kodiya)
गुजरात टूरिज़्म बताता है कि ये असल में "गुफाएँ" नहीं, बल्कि चट्टान में काटे गए बौद्ध भिक्षुओं के रहने के कमरे हैं, जो लगभग 2,000 साल पुराने हैं। उपरकोट के आसपास ऐसी तीन जगहें हैं; इनमें खापरा कोडिया सबसे पुरानी और सबसे सादी है। गुजरात टूरिज़्म के अनुसार इनका टिकट ASI की साइट (asi.payumoney.com) से बुक हो सकता है — टिकट की रक़म वहीं या मौके पर देखें।
4. महाबत मकबरा (Mahabat Maqbara)
पुराने शहर के बीच खड़ा यह मकबरा जूनागढ़ की सबसे मशहूर तस्वीर है। गुजरात टूरिज़्म के अनुसार यह नवाब महाबत ख़ान द्वितीय का मकबरा है, जिसका निर्माण 1878 में शुरू हुआ और 1892 में पूरा हुआ। इसमें इंडो-इस्लामिक और यूरोपीय (गॉथिक) शैली का मेल है — प्याज़ जैसे गुंबद, फ़्रेंच खिड़कियाँ, चाँदी के अंदरूनी दरवाज़े और मीनारों के चारों ओर घूमती सीढ़ियाँ। फ़ोटो के लिए सुबह या शाम की रोशनी सबसे अच्छी रहती है।
5. अशोक शिलालेख (Ashoka Rock Edicts)
गिरनार जाने वाली सड़क पर एक बड़ी चट्टान पर सम्राट अशोक के 14 शिलालेख ब्राह्मी लिपि में खुदे हैं (लगभग 250 ईसा पूर्व)। इनमें लालच छोड़ने, जीव-हत्या न करने और दूसरों के धर्म का सम्मान करने जैसी बातें लिखी हैं। गुजरात टूरिज़्म के अनुसार यह जगह रोज़ सुबह 8 से शाम 6 बजे तक खुली रहती है; टिकट भारतीयों के लिए ₹25 और विदेशियों के लिए ₹250 है, जो ASI की साइट से भी बुक हो सकता है।
6. दामोदर कुंड (Damodar Kund)
गिरनार की तलहटी में स्थित यह पवित्र कुंड हिंदुओं के लिए बहुत महत्व रखता है। जूनागढ़ ज़िला प्रशासन और गुजरात टूरिज़्म की साइट के अनुसार लोग यहाँ स्नान करते हैं और अस्थि-विसर्जन करते हैं, इस मान्यता के साथ कि दिवंगत आत्मा को मोक्ष मिलता है। कुंड लगभग 257 फ़ीट लंबा, 50 फ़ीट चौड़ा और सिर्फ़ 5 फ़ीट गहरा है, चारों ओर पक्के घाट हैं। गिरनार की सीढ़ियाँ भी इसी के पास से शुरू होती हैं।
7. भवनाथ महादेव मंदिर (Bhavnath Mahadev)
गिरनार तलेटी में स्थित यह शिव मंदिर जूनागढ़ की आस्था का केंद्र है। गुजरात टूरिज़्म के अनुसार माघ महीने (जनवरी–फ़रवरी) में यहाँ पाँच दिन का भवनाथ मेला लगता है, जिसमें लोक संगीत, नृत्य और बड़ी संख्या में नागा साधु आते हैं। मेले की तारीख़ हर साल अलग होती है — 2027 की तारीख़ घोषित होने पर हम अलग पोस्ट में बताएँगे। मंदिर के दर्शन का समय हमें किसी आधिकारिक साइट पर नहीं मिला, इसलिए वहाँ पहुँचकर पता करें।
8. गिरनार पर्वत और रोपवे (Girnar Hill & Ropeway)
गुजरात टूरिज़्म के अनुसार गिरनार पर हिंदू और जैन मंदिरों का समूह है और चोटी तक लगभग 10,000 पत्थर की सीढ़ियाँ हैं। गोरखनाथ शिखर (1,117 मीटर) गुजरात की सबसे ऊँची चोटी है; रास्ते में नेमिनाथ जैन मंदिर, अंबाजी मंदिर और आगे दत्तात्रेय शिखर आते हैं। जो लोग सीढ़ियाँ नहीं चढ़ना चाहते, उनके लिए अंबाजी तक रोपवे है — टिकट और समय के लिए हमारी गिरनार रोपवे टिकट प्राइस और टाइमिंग वाली पोस्ट देखें। पैदल चढ़ाई सुबह जल्दी शुरू करें और पूरा दिन रखें।
9. सक्करबाग़ प्राणी उद्यान (Sakkarbaug Zoo)
जूनागढ़ ज़िला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार यह ज़ू 1863 में खुला था और लगभग 200 हेक्टेयर में फैला है। यह ज़ू एशियाई शेरों के संरक्षण-प्रजनन (breeding) कार्यक्रम के लिए जाना जाता है। ज़ू का टिकट, समय और साप्ताहिक बंदी का दिन हमें किसी आधिकारिक साइट पर पक्का नहीं मिला — जाने से पहले स्थानीय रूप से पता कर लें।
10. विलिंगडन डैम और जमियल शाह दातार (Willingdon Dam)
ज़िला प्रशासन के अनुसार यह बाँध कालवा नदी पर पहाड़ी की तलहटी में शहर के पीने के पानी के लिए बनाया गया था और इसका नाम लॉर्ड विलिंगडन के नाम पर है। बाँध के पास से सीढ़ियाँ लगभग 847 मीटर ऊँची पहाड़ी पर जमियल शाह दातार की दरगाह तक जाती हैं, जहाँ हिंदू और मुस्लिम दोनों श्रद्धालु आते हैं। शाम को घूमने के लिए यह एक शांत जगह है।
जूनागढ़ 1 दिन का आसान प्लान
- सुबह: उपरकोट किला, अडी-कडी वाव, नवघण कुवो और बौद्ध गुफाएँ (2–3 घंटे रखें)।
- दोपहर: महाबत मकबरा, फिर दोपहर का खाना और थोड़ा आराम।
- शाम से पहले: अशोक शिलालेख (6 बजे से पहले पहुँचें), फिर भवनाथ मंदिर और दामोदर कुंड।
- अगला दिन: गिरनार चढ़ाई या रोपवे; बच्चों के साथ हों तो सक्करबाग़ ज़ू।
जूनागढ़ से आगे सासण गिर सफ़ारी और सोमनाथ दर्शन का प्लान भी आसानी से जोड़ा जा सकता है। नवंबर में आ रहे हैं तो गिरनार लीली परिक्रमा की भीड़ का ध्यान रखें।
कैसे पहुँचें
गुजरात टूरिज़्म के अनुसार जूनागढ़ का अपना रेलवे स्टेशन है जो गुजरात के बड़े शहरों से जुड़ा है, राज्य और प्राइवेट बसें भी चलती हैं, और सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट केशोद (लगभग 40 km) है। ट्रेन का समय और किराया IRCTC या रेलवे की आधिकारिक साइट पर ही देखें।
ज़रूरी टिप्स
- उपरकोट और बावड़ियों में बहुत चलना और सीढ़ियाँ हैं — आरामदायक जूते पहनें, पानी साथ रखें।
- दोपहर की धूप तेज़ होती है; किला सुबह जल्दी देखें।
- मेले और परिक्रमा के दिनों में होटल पहले से बुक करें।
- धार्मिक जगहों पर कपड़े और नियमों का ध्यान रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
जूनागढ़ घूमने के लिए कितने दिन चाहिए?
शहर की मुख्य जगहें (उपरकोट, महाबत मकबरा, अशोक शिलालेख, दामोदर कुंड, भवनाथ) एक दिन में आराम से देखी जा सकती हैं। गिरनार पर चढ़ाई या रोपवे के लिए एक दिन अलग रखें।
उपरकोट किले का टिकट कितने का है?
किले की टिकट बुकिंग वेबसाइट (uparkotfort.com) के अनुसार भारतीय पर्यटक (12 साल से ऊपर) ₹100, 12 साल से कम बच्चे ₹50, और जूनागढ़ के निवासी ₹50 (बच्चे ₹25)। लाइट एंड साउंड शो का टिकट अलग है।
उपरकोट किला कितने बजे खुलता है?
किले की वेबसाइट पर सुबह 8 से शाम 4 बजे लिखा है, लेकिन साथ में यह भी लिखा है कि समय मौसम के हिसाब से बदल सकता है। गुजरात टूरिज़्म की साइट पर 'सुबह से शाम तक' लिखा है। जाने से पहले 87350-47350 पर पूछ लें।
अशोक शिलालेख देखने का टिकट कितना है?
गुजरात टूरिज़्म के अनुसार भारतीयों के लिए ₹25 और विदेशियों के लिए ₹250। समय रोज़ सुबह 8 से शाम 6 बजे तक।
जूनागढ़ घूमने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
गुजरात टूरिज़्म के अनुसार नवंबर से फ़रवरी। नवंबर में गिरनार लीली परिक्रमा और माघ महीने में भवनाथ मेला भी होता है, उन दिनों भीड़ बहुत ज़्यादा रहती है।
🗓️ Last checked: Oct 2026 (24 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया)
स्रोत (Sources): Gujarat Tourism – Uparkot Fort · Uparkot Fort टिकट बुकिंग साइट (रेट, समय) · Gujarat Tourism – Adi Kadi Vav · Gujarat Tourism – Buddhist Caves · Gujarat Tourism – Mahabat Maqbara · Gujarat Tourism – Ashok Edicts · Gujarat Tourism – Damodar Kund · Gujarat Tourism – Girnar Hill · जूनागढ़ ज़िला प्रशासन – Sakkarbaug Zoo · जूनागढ़ ज़िला प्रशासन – Willingdon Dam · जूनागढ़ ज़िला प्रशासन – Damodar Kund
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